हम यहाँ अकेले क्यों रहते हैं दादी हमारे साथ क्यों नहीं रहतीं ?
बेटे ! हम बड़े अफसर हो गए हैं ना इस लिए.... और फिर बेटा! वो अब बूढ़ी भी हो चली हैं ,
हमें जब कोई "बेटा" कहकर बुलाता है तो बहुत अच्छा लगता है.....
आपको अच्छा नहीं लगता क्या?
ज़िंदगी के हाइवे पर चलते चलते, कभी कभी पगडंडियों पर कुछ किताबें कुछ पन्ने बिखरे मिलते रहते है.. इस जगह उन्हें समेटने की कोशिश कर रहा हूँ ....